बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल से करोड़ो का लेन-देन हुआ प्रभावित

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बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल से करोड़ो का लेन-देन हुआ प्रभावित

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में चल रही कर्मचारियों की हड़ताल से देश भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं. बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए) द्वारा केवल दो प्रतिशत सैलेरी इन्क्रीमेंट दिए जाने से कर्मचारी नाराज़ हैं. उन्होंने कम से कम 15 प्रतिशत की मांग रखी है. इस फैसले के विरोध में कर्मचारी 30 और 31 मई को देशव्यापी हड़ताल कर रहें हैं. हालांकि कुछ प्राइवेट बैंक जैसे आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक का कामकाज  सामान्य देखा गया. इनमें चेक क्लीयरिंग को लेकर परेशानी हुई.

एटीएम ने निभाया साथ –

एक अनुमान के अनुसार सिर्फ 25 प्रतिशत बैंक शाखाओं में बुधवार को सामान्य कामकाज हो सका। इस दौरान एटीएम चालू रहे और लोगों को नकदी निकालने की सुविधा मिलती रही। कुछ राज्यों में हड़ताल का बैंक सेवाओं पर ज्यादा असर होने की खबर है. केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड हड़ताल से प्रभावित दिखे।

ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉईज एसोसिएशन (एआइबीईए) ने एक  बयान के तहत कहा कि “इस हड़ताल में करीब दस लाख बैंक कर्मचारी शामिल हैं। ये कर्मचारी 21 सार्वजनिक बैंकों के अलावा पुरानी पीढ़ी के 13 प्राइवेट बैंक, छह विदेशी बैंकों और 56 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कार्य करते हैं। आइबीए की ओर से की गयी वेतन वृद्धि को लेकर संस्था और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बने हुए हैं. गौरतलब हो कि एआइबीईए कर्मचारी संगठनों के संयुक्त फोरम यूएफबीयू का अंग है।

डिजिटल बैंकिंग का योगदान सिर्फ पांच प्रतिशत –

बैंकिंग क्षेत्र में हड़ताल जैसी परिस्थितियों से राहत दिलाने में डिजिटल बैंकिंग का बड़ा योगदान हो सकता है लेकिन यहाँ कामकाज डिजिटल रूप से बेहद कम होता है. हालाँकि नेट बैंकिंग ने कुछ ग्राहकों की मदद की लेकिन यह आंकड़ा और भी बड़ा हो तो आम आदमी के लिये सुविधा हो जाये. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया में भी कामकाज सामान्य रहा. हालाँकि आरबीआई ने इस हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है.  इसी बीच एसोचेम ने एक आंकड़ा देते हुए कहा की इस हड़ताल की वजह से लगभग 20,000 करोड़ के ट्रांजेक्शन प्रभावित हो सकते हैं. आपको बता दें की सरकारी बैंक क़र्ज़ फंसे होने की वजह से बड़ा घाटा झेल रहें हैं. बीती मार्च तिमाही में ये बैंक 50,000 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ घाटा झेल चुके हैं.

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