सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को सुना सकता है बड़ा फैसला, मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं…!

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या मामले से संबंधित एक पहलू को संवैधानिक बेंच भेजा जाय या नहीं, इस पर 28 सितंबर यानि शुक्रवार को बड़ा फैसला आ सकता है। साथ ही मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं, देश की शीर्ष अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट इस पर भी अपना फैसला सुना सकता है। कोर्ट की एडवांस लिस्ट के अनुसार 28 सितंबर को फैसला सूचीबद्ध है। दरअसल, मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से यह दलील दी गई है कि 1994 में इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा है कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

क्या हैं फारूकी केस

फारूकी केस (1994) में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसले के पैरा न0 82 में कहा था कि मस्जिद इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है और नमाज कहीं भी, यहां तक कि खुले मैदान में भी पढ़ी जा सकती है। यह फैसला अयोध्या में विवादित स्थल को केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत करने की कार्यवाही को दी गई चुनौती के मामले में आया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र का केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहण सही ठहराते हुए कहा था कि विवादित स्थल के मालिकाना हक के बारे में पहले से लंबित दीवानी मुकदमे हाईकोर्ट निपटाए।

गौरतलब हैं कि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत इस पहलू पर फैसला लेगी कि क्या 1994 के सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के फैसले को दोबारा देखने के लिए संवैधानिक बेंच भेजा जाए या नहीं। इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी फैसला सुरक्षित किया है।

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