बर्थडे स्पेशल: भारतरत्न राजीव गांधी का एक फैसला बना उनकी हत्या की वजह…!

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नई दिल्ली: भारतरत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर आज यानी सोमवार को उनके समाधि स्थल पर सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि दी| उनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी वाड्रा, राबर्ट वाड्रा समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी| बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न राजीव गांधी की आज जयंती है| वे देश के छठवें और सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी सिर्फ 40 वर्ष की उम्र में ही प्रधानमंत्री बन गए थे। 20 अगस्त, 1944 को मुंबई में जन्मे राजीव गांधी की 21 मई 1991 में आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु में हत्या कर दी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी जिसपर अभी भी विवाद बना हुआ है। उनके हत्याकांड में शामिल आरोपी जेल में बंद हैं जिनकी रिहाई को लेकर अभी भी समय-समय पर राजनीति होती रही है।

भारतरत्न राजीव गांधी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका विजन हम सबको आज भी प्रेरणा देता है। राजीव गांधी की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून में हुई। 1961 में वह लंदन गये और वहां के इम्पीरियल कॉलेज और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल किए और वे साल 1966 में मां इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत वापस आ गए थे| 31 अक्टूबर 1984 को मां इंदिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की पूरी बागडोर उन्हीं के कंधों पर डाल दी। और वह 1984 में हुए आम चुनावों में सबसे अधिक बहुमत पाकर देश के छठवें और सबसे युवा प्रधानमंत्री बने।

राजीव गांधी अपने कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए लेकिन उन्ही फैसले में से एक फैसले ने उनकी जान ले लिया| दरअसल जब श्रीलंका में जातीय संघर्ष चल रहा था तो उस वक्त 1987 में भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत भारतीय सेना श्रीलंका में हस्तक्षेप करने पहुंची थी। समझौते के तहत एक भारतीय शांति रक्षा सेना बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य श्रीलंका की सेना और लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) जैसे उग्रवादी संगठनों के बीच चल रहे ग्रहयुद्ध को खत्म करना था। उस दौरान लिट्टे चाहता था कि भारतीय सेना वापस चली जाए, क्योंकि वह हमारी सेना के श्रीलंका में जाने की वजह से वह अलग देश की मांग नहीं कर पा रहा था। राजीव के फैसले ने लिट्टे के मंसूबों का कामयाब नहीं होने दिया। हालांकि जब 1989 में वीपी सिंह की सरकार आयी तो उन्होंने भारतीय सेना श्रीलंका से वापस बुला ली थी, जिससे लिट्टे को काफी राहत मिली। लेकिन जब 1991 में फिर से चुनाव होने वाले थे तो लिट्टे को डर सता रहा था कि कहीं राजीव प्रधानमंत्री बन गए तो वह दोबारा श्रीलंका में सेना भेज सकते हैं। इसी वजह के चलते लिट्टे उग्रवादियों ने 21 मई 1991 को तमिनलाडु की एक चुनावी सभा में राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला कर उनकी जान ले ली।

राजीव गांधी के प्रमुख फैसले
– राजीव गांधी ने अर्थव्यवस्था के सेक्टर्स को खोला।

– साल 1988 में की गई उनकी चीन यात्रा ऐतिहासिक थी।

– अगले दशक में होने वाली आईटी क्रांति की नीव राजीव गांधी ने ही रखी।

– मतदान उम्र सीमा 18 साल की और ईवीएम मशीनों की शुरुआत की।

– राजीव ने पंचायती राज के लिए विशेष प्रयास किए।

 श्रीलंका समझौता (जिसने उनकी जान ले ली)

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