भाजपा में शामिल होना चाहते हैं मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में फैसला सुनाने वाले पूर्व जज रविंदर रेड्डी…!

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इनदिनों सभी राजनीतिक पार्टियां आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सियासी जमीं पर अपनी-अपनी पकड़ मजबूत करने में तथा जनता के बीच अपनी-अपनी पार्टी की छवि चमकने में लगी हुई हैं| इसी कड़ी में हैदराबाद से बड़ी खबर आ रही है| दरअसल मीडिया में आई खबरों के मुताबिक भाजपा के एक नेता ने यह बताया हैं कि पूर्व जज रविंदर रेड्डी भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। पार्टी नेता ने आगे बताया हैं  कि 14 सितंबर को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जब हैदराबाद के दौरे पर आए थे, तब पूर्व जज ने उनसे मुलाकात की थी और भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई थी।

गौरतलब हैं इसी साल 16 अप्रैल को मक्का मस्जिद विस्फोट मामले की हुई सुनवाई में विशेष आतंकवाद निरोधक अदालत के तत्कालीन न्यायाधीश रविंदर रेड्डी ने हिंदुत्व प्रचारक स्वामी असीमानंद समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके तुरंत बाद उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया था।

बता दे, कि तेलंगाना के भाजपा अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण ने बताया हैं कि वह पार्टी में एक बुद्धिजावी के तौर पर अपना योगदान दे सकते हैं या चुनावी राजनीति में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि रविंदर रेड्डी को पार्टी में शामिल किया जाएगा या नहीं और अगर शामिल किया जाता है तो उन्हें कौन-सी जिम्मेदारी दी जाती है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पूर्व जज रविंदर रेड्डी ने भाजपा को देशभक्त पार्टी बताया है। एक भाजपा नेता ने बताया कि जब वह अमित शाह से मिले, तो उन्होंने भाजपा जैसी राष्ट्रवादी और देशभक्ति पार्टी के लिए काम करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। पार्टी नेता के मुताबिक, रेड्डी ने कहा कि मैंनें पार्टी में इसलिए शामिल होने की इच्छा जताई है, क्योंकि मेरा मानना है कि यह देशहित में सोचने वाली पार्टी है। राष्ट्रीय स्तर की यह एक मात्र देशभक्त पार्टी है और इस पार्टी में परिवार का शासन नहीं चलता है।

पूर्व जज रविंदर रेड्डी ने क्यों दिया था इस्तीफ़ा और क्या था उनका मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में फैसला ?

पूर्व जज रविंदर रेड्डी ने मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि वह व्यक्तिगत आधार पर इस्तीफा दे रहे हैं। मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में अपने फैसले में रेड्डी ने कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि असीमानंद और अन्य आरोपी 18 मई, 2007 को मक्का मस्जिद में हुए बम विस्फोट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल थे। बता दे, कि मक्का मस्जिद विस्फोट धमाके में 9 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पूर्व जज ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि सिर्फ संघ (आरएसएस) से जुड़ने का मतलब सांप्रदायिक बनना नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा था कि आरएसएस कोई गैरकानूनी रूप से काम करनेवाला संगठन नहीं है। यदि कोई शख्स इसमें काम करता है तो इससे यह साबित नहीं होता कि वह सांप्रदायिक या फिर समाज विरोधी है।

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