विपक्ष के महागठबंधन से अपनी नैया पार लगाने के लिए, भाजपा यूपी में शुरू करेगी मिशन 50%….!

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विपक्ष के महागठबंधन से अपनी नैया को पार लगाने के लिए भाजपा बहुत जल्द यूपी में मिशन 50 प्रतिशत शुरू करने जा रही हैं| भाजपा इस अभियान के तहत साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मिले तक़रीबन 43 प्रतिशत मतों को 50 प्रतिशत में तब्दील करने के लिए तानाबाना बुनेगी| यूपी में चुनाव से ठीक पहले दिल्ली के आर्कबिशप का विवादास्पद पत्र और देवबंद की तरफ से जारी फतवा के खिलाफ संत समाज भी बीजेपी के समर्थन में मैदान में उतर कर प्रचार प्रसार करेगा। इसके अलावा भाजपा कैराना और नूरपुर में विपक्ष के महागठबंधन (सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद) से मिली शिकस्त को भी वोट बैंक के दृष्टिकोण से कोई बड़ा झटका नहीं मान रहा है।

खबरों के मुताबिक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव में मिले  हार के बाद से ही अपने वोट प्रतिशत दर को 50 प्रतिशत तक ले जाने का प्रबंध करना शुरू कर दिया था। अब कैराना-नूरपुर कि चुनाव से आए नतीजों के बाद से इस मुद्दे पर पहल और जल्द से जल्द होगी| भाजपा की रणनीति अब सिर्फ़ आगामी चुनाव को जीतने के लिए नया वोट बैंक तैयार करने की रहेगी| इसके लिए वह जाट-यादव के अलावा मुसलमानों की पिछड़ी जाति के साथ-साथ कुछ अन्य अत्यंत पिछड़ी जाति में अपनी आधार मजबूत करने के लिए अपना अगला कदम उठाएगी|

भाजपा के मुताबिक, मीडिया कैराना-नूरपुर में भाजप की हार को तथ्यों से परे जा कर एक बड़ी हार के रूप में प्रचारित कर रहा है। गोरखपुर-फूलपुर के जैसे ही इन सीटों पर भी भाजपा अपने समर्थकों को विपक्षी दलों के समर्थकों की तुलना में वोटिंग बूथ तक नहीं ला पाई। 4 विपक्षी दलों के महागठबंधन होने के बावजूद भी मुस्लिम बहुल एरिया कैराना में जहां भाजपा को 46.5 प्रतिशत मत मिले हैं, वहीं नूरपुर में पिछले विधानसभा की चुनाव के अपेक्षा इस बार 4 प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं। उनके मुताबिक अगर कैराना चुनाव में अंतिम वक्त में एक मुस्लिम उम्मीदवार नहीं हटा होता तो कैराना की इस समय कुछ और तस्वीर होती। भाजपा इनदिनों कैराना में इकठ्ठा जाटों-दलितों का वोट पाने का भी दावा कर रही है।

गौरतलब हैं कि दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउटो  विवादास्पद पत्र और देवबंद की तरफ से चुनाव के दौरान जारी फतवा के विरोध में संत समाज ने भी अपना मोर्चा खोलने की घोषणा की है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा हैं कि ‘चर्च और देवबंद ने चुनाव से कुछ दिनों पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा दिया हैं। इसके जवाब में संत समाज भी हिंदुओं के मध्य एकजुटता के लिए मैदान में उतरेगा।

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