Mission 2019: टेंशन में भाजपा के मंत्री और विधायक, सता रहा हैं उनको ये बड़ा डर….!

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आगमी लोकसभा चुनाव को लेकर इन दिनों हरियाणा में भाजपा के कई मंत्री, विधायक और सांसद सीट को लेकर टेंशन में हैं। दरअसल इन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को आगमी चुनाव में अपना टिकट कटने का खतरा नजर आ रहा है। बता दे, कि स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी, चुनाव से पहले प्रमुख कार्यकर्ताओं का पार्टी नेता के लिए फीडबैक और विस्तारकों की रिपोर्ट टिकट कटने का बड़ा आधार बनेगी। भारतीय जनता पार्टी ने भले ही हर जिले में प्रभारी नियुक्त कर चुनावी जीत का खाका तैयार कर लिया है, मगर जिम्मेदारी उन्हीं नेताओं को मिली है, जिनका टिकट कटने वाला हैं।

गौरतलब हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की देखरेख के लिए बनी समिति की शनिवार को गुरुग्राम में बैठक हुई| समिति में जिन मुद्दों पर ज़्यादा चर्चा हुई, उन्हें सुनकर मंत्रियों व विधायकों के चेहरे की हवाइयां उड़ गई। बैठक का मुख्य मुद्दा कार्यकर्ताओ को घर से निकालकर फील्ड में भेजने का रहा। बैठक में कई नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं ने यह माना कि आम कार्यकर्ता अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। इसकी बड़ी वजह वही मंत्री और विधायक है, जिन्हें आगमी चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 दरअसल बैठक में कार्यकर्ताओं के द्वारा कहा गया कि मंत्री चंडीगढ़ में उनकी सुनवाई नहीं करते, जबकि क्षेत्र में उनके दौरों की जानकारी तक नहीं दी जाती। आम कार्यकर्ता अधिकारियों की अनदेखी के शिकार पहले से है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को तैयार कर चुनावी क्षेत्र में उतारना पार्टी के सामने बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से पार पाने के लिए अब पार्टी प्रभारी डॉ॰ अनिल जैन, कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।

 भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुरेश भट्ट को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए जो संभव हो सके, उसे अमल में लाएं। बैठक में इनेलो-बसपा गठबंधन के जेल भरो आंदोलन का जवाब देने का सुझाव भी आया।

बता दे, कि गुरुग्राम में बैठक के बाद से अब बीजेपी नेताओ और कार्यकर्ताओं को अपनी चाल ढाल बदलने के लिए मजबूर होना पड़ गया है। गौरतलब हैं कि अब मंत्रियों को कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए कहा जा रहा है, क्योंकि इसका नुकसान उन्हें खुद भी भुगतना पड़ेगा|

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