Mission 2019: आगामी लोकसभा चुनाव के पहले कौन नेता किधर पाला बदलेगा, राजनीतिक गलियारों में मंथन जारी

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पटना: अब लगभग ये तय हो गया है कि आगमी लोकसभा की चुनाव बिहार में 12 साल से अधिक सत्ता की बागडोर संभालती आ रही नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एनडीए से गठबंधन करके ही चुनाव लड़ेगी, लेकिन फिर भी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। वहीं, कुछ छोटे-छोटे अन्य दल भी चुनाव से पहले पाला बदलने की तैयारी में हैं।

गौरतलब हैं कि पिछले महीने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पटना दौरे के बाद जदयू को लेकर चल रही कयासबाजी पर पूरी तरह से विराम लग गया, लेकिन बीते दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर आरजेडी के धरना में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान के तेवर से लोगों का संदेह बढ़ गया। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कांग्रेस के कुछ बड़े नेता जेडीयू नेताओं के अभी भी संपर्क में हैं।

बताते चले कि कांग्रेस पार्टी को यह उम्मीद है कि एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर विवाद होना तय है। विधानसभा में जदयू के संख्या बल के मुताबिक लोकसभा की सीटें दे पाना भाजपा नेतृत्व के लिए संभव नहीं होगा। ऐसे में जेडीयू एनडीए से लोकसभा के चुनाव में गठबंधन तोड़ सकता है।

हालांकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के तुरंत बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि सीटों का बंटवारा एक महीने में तय हो जाएगा। अमित शाह को गए एक महीने हो भी गए। पिछले दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस में जब मुख्यमंत्री से इस संबंध में सवाल किया गया तो वे केवल मुस्करा कर रह गए।

बिहार में एनडीए की एक और सहयोगी रालोसपा से अलग होकर जहानाबाद सांसद अरूण कुमार ने अलग पार्टी बना ली है। दोनों के बीच दूरी इतनी बढ़ गयी है कि दोनों का अब एक गठबंधन में रहना संभव नहीं हैं। रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा अगर एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो अरूण कुमार कांग्रेस के प्रस्तावित महागठबंधन से मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। मुजफ्फरपुर कांड पर नैतिकता के आधार पर नीतीश कुमार से इस्तीफा मांग कर उन्होंने इसके संकेत भी दे दिए हैं।

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