छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी नहीं दिया साथ लेकिन राहुल गांधी को अब भी आस- 2019 में मायावती आएंगी साथ

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नई दिल्ली: बसपा सुप्रीमो मायावती भले ही आगामी विधानसभा के चुनाव में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छ्तीसगढ़ में कांग्रेस से गठबंधन न कर अलग होकर चुनाव लड़ने ऐलान कर चुकी हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अभी भी भरोसा है कि आगमी लोकसभा का चुनाव आते-आते राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल हो जाएंगी| कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुताबिक बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ऐसा ही संकेत दिया है|

दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि केन्द्र में गठबंधन और राज्य में गठबंधन अलग-अलग मसला है| शुक्रवार (5 अक्टूबर) को एचटी लीडरशिप समिट कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “राज्यों में हम लचीला रुख अपनाने को तैयार हैं, वास्तव में मैं तो अपने प्रादेशिक नेताओं से भी ज्यादा लचीला रवैया अपनाने को तैयार था…हमारी बातचीत बीच में ही थी, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने अपना अलग रास्ता चुन लिया|” कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि ‘उनकी समझ में मध्य प्रदेश में बीएसपी के साथ गठबंधन नहीं होने का कांग्रेस पर कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है| राहुल ने कहा, “अच्छा होता अगर एलायंस हुआ होता लेकिन फिर भी मुझे भरोसा है कि हम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतेंगे|”

गौरतलब है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सहयोगी तलाश रहे राहुल गांधी ने कहा कि ‘उन्हें यकीन है कि आम चुनाव के लिए मायावती साथ आ जाएंगी| राहुल ने कहा, “मेरी समझ में नेशनल इलेक्शन तक दोनों पार्टियां साथ होंगी, खासकर उत्तर प्रदेश में| राहुल गांधी से जब पूछा गया कि क्या वो गठबंधन को लेकर आश्वस्त हैं? इस पर राहुल ने कहा कि अबतक मिल रहे संकेतों के आधार पर वे ऐसा कह सकते हैं| राहुल ने दावा किया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत को लेकर उन्हें भरोसा है|

बता दें छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी मायावती ने कांग्रेस अलग होकर विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा की है| मायावती ने कांग्रेस के महासचिव व मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर हमला करते हुए कहा था कि ये नेता राज्य में बीएसपी और कांग्रेस का गठजोड़ नहीं होने देना चाहते हैं| हालांकि मायावती ने इस दौरान ये भी कहा था कि बसपा ने देशहित को ध्यान में रखकर हमेशा कांग्रेस का साथ दिया। इसके बदले काफी बदनामी मोल ली है, लेकिन बसपा नेतृत्व का शुक्रगुजार होने के बजाय कांग्रेस ने भाजपा की तरह पीठ पर पीछे से छुरा घोंपने का काम किया। उन्होंने आगे कहा कि ताजा घटनाओं से कांग्रेस का रवैया ठीक नहीं लगता। ऐसी स्थिति में पार्टी व मूवमेंट के हित में बसपा कांग्रेस के साथ किसी भी स्तर पर गठबंधन नहीं करेगी

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