प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत खुले इतने खाते, कोई लेनेदेने न होने की वजह से होंगे बंद…!

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प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 66 लाख खाते अब बंद हो सकते हैं। ये वो खाते हैं जिनमे बीते दो साल से एक भी बार लेनदेन नहीं हुआ हैं| इसलिए बैंक इन खातों को निष्क्रिय मान रही हैं। इनमें से करीब दो लाख खाते तो सिर्फ़ लखनऊ जिले के हैं।

बता दे, कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत वर्ष 2014 से सभी राष्ट्र्रीयकृत व निजी बैंकों के द्वारा जीरों बैलेंस पर खाते खोले गए थे। इस स्कीम का यह मकसद था कि बैंकिग सेवाओं से जो तबका अभीतक वंचित हैं उनकों भी बैंकों से जोड़ा जाये। पिछले दो सालों से करीब 66 लाख जनधन खाता धारक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने खाते से कोई लेनदेन ही नहीं किया हैं। इन खातों में अभीतक जीरों बैलेंस ही बरकरार है। इसलिए बैंकें ऐसे खातों पर लेनदेन पर रोक लगाने के साथ ही इन्हें बंद करने पर भी विचार कर रही हैं।

दरअसल इस स्कीम के अंतर्गत खाते लगभग लोगों ने पीएम आवास पाने तो किसी ने 15 लाख आने के लालच में खाते खोलवाए थे। अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के मकसद से भी जनधन खाते खोलवाए गए। बैंकों में भी इन खातों को खोलने की लोगों में खूब होड़ रही थी। बैंक सूत्रों की माने तो इन खातों में लंबे समय से कोई लेनदेन न होने के वजह से ये खाते शक के दायरे में भी आ रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये जनधन खाते उन खाताधारकों के हैं जिन्होंने एक नहीं बल्कि कई बैंकों में खाते खोलवाए थे।

आपकी जानकारी के लिए बता दे, कि सभी बैंकों द्वारा उपलब्ध कराए गए आकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 4 करोड़ 78 लाख 87 हजार 511 जनधन खाते हैं। आधार से खातों को सीडिंग (लिंक) किए जाने के दौरान यह संख्या सामने आई है। इनमे से 66 लाख ऐसे जनधन खाते हैं जिनमें बीते दो सालों से लेनदेन नहीं हुआ है। बहरहाल बैंकें 30 जून तक की मियाद के समाप्त होने के इंतजार में है। इलाहाबाद बैंक महाप्रबंधक दिनेश कुमार के मुताबिक, ऐसे खाता धारकों को नोटिस दी गई है। यह मालूम करने का प्रयास किया गया है कि खाताधारक अस्तित्व में है अथवा नहीं। अगर खाताधारक की ओर से जवाब नहीं मिलता हैं तो ऐसे खातों को बंद कर दिया जाएगा। और इन खातों के संबंध में निर्देशों के आधार पर कार्यवाही की जाएगी।”

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