धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के राष्ट्रपति भवन में नहीं होगा इफ़्तार पार्टी का आयोजन

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धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के राष्ट्रपति भवन में नहीं होगा इफ़्तार पार्टी का आयोजन

एक नयी खबर चर्चा का विषय बनी हुई है कि राष्ट्रपति भवन में इस साल इफ़्तार पार्टी का आयोजन  नहीं होगा. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस धार्मिक समारोह की मेजबानी अस्वीकार की है.राष्ट्रपति के मीडिया सेकेट्री अशोक मलिक के अनुसार राष्ट्रपति कोविंद ने अपना कार्यभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्रपति भवन में करदाताओं के पैसे से कोई भी धार्मिक आयोजन नहीं होगा. उनका मानना है कि यह पहल देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को मजबूत करेगी. राष्ट्रपति का निर्णय सभी धर्मों के लिये समान रूप से कार्य करेगा. किसी भी धर्म के साथ पक्षपात नहीं किया जायेगा.

अशोक मालिक ने कहा कि राष्ट्रपति सभी धर्मों के लोगों को उनके धार्मिक त्योहारों पर शुभकामनाएं देते हैं और यह जारी रहेगा. गौरतलब हो कि कई साल के बाद राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी नहीं होगी. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति कार्यकाल (2002 से 2007 तक) में भी इफ़्तार पार्टी का आयोजन नहीं होता था. लेकिन उनके बाद से राष्ट्रपति भवन में इफ़्तार की दावत देने की परम्परा रही. दरअसल राष्ट्रपति भवन धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का बड़ा प्रतीक है. ऐसे में किसी धर्म विशेष का समर्थन करना उचित नहीं माना जा सकता. हालाँकि राष्ट्रपति भवन परिसर में रहने वाले किसी भी अफसर या कर्मचारी पर कोई रोक-टोक नहीं होगी. वो सभी अपने धर्म से जुड़े त्योहारों को मनाने के लिए आजाद हैं.

पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के ही कार्यकाल में क्रिसमस पर होने वाली कैरोल सिंगिंग का भी राष्ट्रपति भवन में आयोजन नहीं किया गया था. एक बार देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल में ऐसे ही एक पारंपरिक आयोजन को मुंबई हमलों के चलते रद्द कर दिया था. लेकिन इफ्तार पार्टी का आयोजन प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी दोनों के कार्यकाल में हुआ. राष्ट्रपति भवन को लेकर हुए इस फैसले को आलोचना और सराहना दोनों मिल रहीं हैं.

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